कविता: पहाड़ की चुप्पी मेंBy / April 18, 2026 जब शहर की आवाज़ थक जाती है, तब पहाड़ की चुप्पी बोलती है.उस चुप्पी में घर भी है, दूरी भी, और लौट आने की एक कोमल उम्मीद भी.